उत्तराखण्ड

आपातकाल के विरोध में उठी हर आवाज को सादर प्रणाम : वंशिका सोनकर

भाजपा नेत्री वंशिका सोनकर ने कहा कि आज ही के दिन 25 जून, 1975 में तत्‍कालीन सरकार ने लोकतंत्र की हत्‍या कर देश में आपातकाल की घोषणा की थी, जो भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन था।

देहरादून। युवा भाजपा नेत्री, प्रसिद्ध समाजसेवी एवं वार्ड संख्या 18 इंदिरा कॉलोनी की नगर निगम पार्षद वंशिका सोनकर ने देश में इमरजेंसी लागू होने की घटना की 51वीं बरसी पर आपातकाल की याद में मनाये जाने वाले ‘काला दिवस’ पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आपातकाल को ‘संविधान हत्या दिवस’ बताया।

युवा भाजपा नेत्री वंशिका सोनकर ने आपातकाल की बरसी के मौके पर उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया जो लोग इमरजेंसी के दौरान मौके पर डटे रहे। उन्होंने कहा- भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के सबसे दुःखद और काले अध्याय 25 जून, 1975 ‘आपातकाल’ के विरोध में उठी हर आवाज को सादर प्रणाम।

वंशिका सोनकर ने कहा- भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून, 1975 वह काला दिन है, जब कांग्रेस, खासकर तब की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने ‘सत्ता के अहंकार’ में चूर होकर देश पर आपातकाल थोपा था। इसके ज़रिए उन्होंने संविधान को अपने शिकंजे में कसकर जनता के मूलभूत अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर जमकर प्रहार किया। उन्हें गहरी चोट पहुंचाई।

वंशिका सोनकर ने कहा- ‘संविधान हत्या दिवस’ हमें उस काले दौर की याद दिलाता है, जब असहमति की आवाज़ों को कुचला गया, प्रेस की स्वतंत्रता पर पहरा बिठाया गया और लोकतंत्र सेनानियों को बेरहमी से जेलों की सलाख़ों के पीछे डाल दिया गया। यह आपातकाल कांग्रेस की ‘तानाशाही मानसिकता’ का नतीजा था।

उन्होंने कहा- लोकतंत्र की रक्षा के लिए तब की प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अडिग रहकर संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों का साहस, त्याग और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। इस काले दौर का डटकर मुकाबला करने वाले उन सभी लोकतंत्र सेनानियों को बारंबार कोटि-कोटि नमन!

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